Sudhro Thari Kaya
Shri Ram

सुधरो थारी काया

Sudhro Thari Kaya

गायक
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संगीतकार
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गीतकार
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भाषा
Rajasthani
Rajasthani Bhajan Shri Ram

सत्य आचरण और ईमानदारी की सीख देता पारंपरिक राजस्थानी भजन।

सुधरो थारी काया जी, ओ हो जी, अपने धनिया राम ने, रजिया रे बुढ़वा, सुधरो थारी काया जी। अरे कड़वा नीम की निंबोली, अच्छी तो पुण्य सरम आई है। ओ हो जी, वह राम बड़वाले, सुधरो थारी काया जी। अरे खरी-खरी खूंटे, खरी-खरी लागे, रामजी के चरण ढूंढ़कर, दीना खेड़ी अच्छी तो, वह राम बड़वाले, सुधरो थारी काया जी। अरे झूठ मत बोलो जी, मत पसारे महीनें, झूठ मत बोलो जी, मन जाई रे मन जाई, वह राम बड़वाले, सुधरो थारी काया जी। अरे हंसा हाथ नहीं आए, उजड़ खेडा में मत जाओ, वह राम बड़वाले, सुधरो थारी काया जी।

यह भजन पारंपरिक/सार्वजनिक डोमेन रचना है।

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