Thari Kaya Ro Gulabi Rang
Shri Ram

थारी काया रो गुलाबी रंग उड़ जासी

Thari Kaya Ro Gulabi Rang

गायक
Moinuddin Manchala
संगीतकार
Information unavailable
गीतकार
Information unavailable
भाषा
Rajasthani
Rajasthani Bhajan Shri Ram

जीवन की क्षणभंगुरता पर आधारित पारंपरिक राजस्थानी निर्गुण भजन।

थारी काया रो गुलाबी रंग उड़ जासी, उड़ जासी रे पंछी, उड़ जासी। उजाला सिर को पर जासी, थारी काया रो गुलाबी रंग उड़ जासी। हरा-हरा रूखड़ा, फल लागे रे घणा, एक दिन झड़ जासी, फूल पड़ जासी मान। थारी काया रो गुलाबी रंग उड़ जासी। सूरज उगे, दिन ढल जावे रे, तख्तियां सब पड़ जावे, खेल खतम हो जासी। थारी काया रो गुलाबी रंग उड़ जासी। रैन बसेरा पंछी, भोर भई रे उड़ जासी, खेले खेल खतम हो जावे, माया सब छूट जासी। थारी काया रो गुलाबी रंग उड़ जासी।

यह भजन पारंपरिक/सार्वजनिक डोमेन रचना है।

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