Safar Hai Lamba
Shri Ram

सफर है लंबा

Safar Hai Lamba

गायक
Information unavailable
संगीतकार
Information unavailable
गीतकार
Sant Kabir Das
भाषा
Hindi
Kabir Shri Ram

संत कबीर की वाणी पर आधारित निर्गुण भजन, जो सांसारिक मोह-माया छोड़ने की सीख देता है।

भाई रे सफर है लंबा, मतलब उड़ा डालो कि, अब होश में आ, अब होश में आ। डाली पे पंछी बोले, हरि की माला जप ले, अब मोह-माया छोड़ डालो, कि अब होश में आ। भाई रे सफर है लंबा, मतलब उड़ा डालो कि, अब होश में आ। सब लागे उभरी, सब जागे रे अनमोल में उभरी, टूट गया तेरा, गई रे आन-बान, अब मोह-माया छोड़ डालो, कि अब होश में आ। कहे कबीर सुनो भाई साधो, दुनिया है अंधी, बदल लो अपना रास्ता, अब मोह-माया छोड़ डालो, कि अब होश में आ। अरे, ये संसार है, एक मुसाफिर खाना, अब होश में आ, अब मोह-माया छोड़ डालो, कि अब होश में आ।

यह भजन पारंपरिक/सार्वजनिक डोमेन रचना है।

संबंधित भजन